मैं अपने आप से कुछ भी नहीं कर सकता। केवल मेरे भीतर निवास करने वाला प्रभु ही सब कुछ कर सकता है। “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता; जैसा सुनता हूँ, वैसा न्याय करता हूँ; और मेरा न्याय सच्चा है, क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, परन्तु अपने भेजनेवाले की इच्छा चाहता हूँ।” (यूहन्ना 5:30) (1) “यीशु पर विश्वास करने के लिए गवाही” शीर्षक के अंतर्गत मैंने यूहन्ना 5:30–47 तक के पूरे भाग को केवल कोरियाई बाइबल से पढ़ा। उसके बाद भी मेरे मन में बार-बार यह इच्छा जागती रही कि मैं केवल 30वें पद पर मनन करूँ। इसलिए आज मैं पहले केवल इसी एक पद पर मनन करना चाहता हूँ। इस मनन में मैं “मेरा न्याय”, अर्थात् प्रभु के न्याय पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूँ। साथ ही, प्रकाशितवाक्य 20:11–15 में वर्णित “बड़े श्वेत सिंहासन के न्याय” पर भी विचार करते हुए उससे मिलने वाली शिक्षा ग्रहण करना चाहता हूँ। (a) सबसे पहले, मैं यीशु के इन शब्दों पर मनन करना चाहता हूँ: “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता” [ ο ὐ δύνα μ αι ἐ γ ὼ ποιε ῖ ν ἀ π ᾽ ἐ μ αυτο ῦ ο ὐ δέν ...
이것이 제일 첫 번째 하나님의 구원이라 생각합니다 . 사드락과 메삭과 아벳느고의 말을 들은 느부갓네살 왕은 “ 잔뜩 화가 ” 나서 “ 평소 때보다 용광로의 불을 7 배나 더 뜨겁게 하라고 지시 ” 하고 “ 또 건장한 군인 몇 사람에게 사드락과 메삭과 아벳느고를 단단히 묶어 뜨겁게 타는 용광로 속에 던져 넣으라고 명령 ” 했습니다 . 그 결과 “ 이 세 사람은 꽁꽁 묶인 채 뜨겁게 타는 용광로 속에 떨어졌 ” 습니다 ( 다니엘 3:19-23, 현대인의 성경 ). 그리했을 때 사드락과 메삭과 아벳느고는 그 “ 건장한 군인 몇 사람 ” 들이 “ 그 불길에 타서 죽 ” 은 것처럼 (22 절 , 현대인의 성경 ) 그들도 그 불길에 타서 죽었어야 했다고 생각합니다 . 그런데 사드락과 메삭과 아벳느고는 그 불길에 타서 죽지 않았습니다 . 이것이 제일 첫 번째 하나님의 구원이라 생각합니다 . 그런데 만이 그들이 그 불길에 타서 죽었다면 과연 그것도 하나님의 구원이라 말할 수 있을까요 ? 아니면 , 그것이 하나님의 주권적인 뜻이라고 말해야 하는 것인가요 ?