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आइए हम एक-दूसरे से प्रेम करें। [रोमियों 13:8-10]

  आइए हम एक - दूसरे से प्रेम करें।       [ रोमियों 13:8-10]     दूसरों के साथ आपके रिश्ते कैसे हैं ? इंसानी रिश्तों पर एक सदाबहार क्लासिक किताब है जो उन लोगों के लिए उपयोगी सुझाव देती है जिन्हें लोगों से जुड़ने में मुश्किल होती है : डेल कार्नेगी की * हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपल * (How to Win Friends and Influence People) । कार्नेगी को इंसानी रिश्तों का माहिर माना जाता है। मैं आज आपके साथ इस विषय पर उनकी कुछ बातें साझा करना चाहता हूँ : (1) दूसरों में सच्ची दिलचस्पी लें ; (2) अच्छे श्रोता बनें — ऐसा आरामदायक माहौल बनाएँ जहाँ सामने वाला व्यक्ति अपने बारे में खुलकर बात कर सके ; (3) सामने वाले व्यक्ति की रुचियों के बारे में बात करें ; (4) छोटी - छोटी सुधारों के लिए भी दिल खोलकर तारीफ़ करें ; और (5) सामने वाले व्यक्ति की राय की आलोचना करने , उसे कमतर आंकने या शिकायत करने से बचें। आप क्या सोचते हैं ? ये ऐसी बातें ...

꼭 배우고 싶습니다.

 꼭 배우고 싶습니다. 우리가 부지런히 배워야 할 것 중 하나는  바로 ' 자족의 비결 '(the secret of being content) 입니다 ( 빌립보서 4:11-12).   어떠한 형편에든지 , 즉 풍부할 때에든지 궁핍할 때에든지  우리는 자족하기를 배워야 합니다 .   그러기 위해선  우리는 주님 한분 만으로 만족할 줄 알아야 합니다 .   그리할 때 우리는 풍부할 때에도  욕심을 내지 않고 자족하면서  은혜로 주신 풍부함을 주님의 영광을 위해서 사용할 수 있으며  또한 궁핍할 때에도  원망하지 않고 일용할 양식을 주시는 주님께 감사할 수 있습니다 .   그러므로 우리는 " 내게 능력 주시는 자 안에서  내가 모든 것을 할 수 있느니라 " 고 고백할 수 있을 것입니다 (13 절 ).