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आइए हम एक-दूसरे से प्रेम करें। [रोमियों 13:8-10]

  आइए हम एक - दूसरे से प्रेम करें।       [ रोमियों 13:8-10]     दूसरों के साथ आपके रिश्ते कैसे हैं ? इंसानी रिश्तों पर एक सदाबहार क्लासिक किताब है जो उन लोगों के लिए उपयोगी सुझाव देती है जिन्हें लोगों से जुड़ने में मुश्किल होती है : डेल कार्नेगी की * हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपल * (How to Win Friends and Influence People) । कार्नेगी को इंसानी रिश्तों का माहिर माना जाता है। मैं आज आपके साथ इस विषय पर उनकी कुछ बातें साझा करना चाहता हूँ : (1) दूसरों में सच्ची दिलचस्पी लें ; (2) अच्छे श्रोता बनें — ऐसा आरामदायक माहौल बनाएँ जहाँ सामने वाला व्यक्ति अपने बारे में खुलकर बात कर सके ; (3) सामने वाले व्यक्ति की रुचियों के बारे में बात करें ; (4) छोटी - छोटी सुधारों के लिए भी दिल खोलकर तारीफ़ करें ; और (5) सामने वाले व्यक्ति की राय की आलोचना करने , उसे कमतर आंकने या शिकायत करने से बचें। आप क्या सोचते हैं ? ये ऐसी बातें ...

"그 꿈 이루어 주옵소서"

"그 꿈 이루어 주옵소서"   요셉은 그의 나이가 적어도 37 살이 지나서 [30 세에 총리 ( 창세기 41:46) + 7 년 풍년 (29 절 ) + ? 년째 흉년 = 적어도 37 살 ] 그의 10 명의 형들이 이집트 ( 애굽 ) 까지 내려와서 총리인 자기 앞에 와서 땅에 엎드려 절했을 때 ( 창세기 42:6, 현대인의 성경 ) 과연 자기가 17 살 때 (37:2) 두 번이나 꿈을 꾼 내용 (5-10 절 , 현대인의 성경 ) 대로 자기 형들이 자기에게 절하는구나 라고 생각을 하였었을까요 ?  적어도 20 년 만에 만난 형들이 자기 앞에 와서 땅에 엎드려 절했을 때 과연 요셉은 20 년 전에 꾼 두 번의 꿈이 성취되고 있었다고 생각하였었을까요 ?  창세기 42 장 9 절 상반절 말씀입니다 : “ 요셉은 오래 전에 그들에 대하여 꾼 꿈을 생각하며 ….”  새 찬송가 490 장 " 주여 지난 밤 내 꿈에 " 1 절과 후렴 가사가 생각납니다 : (1 절 ) 주여 지난 밤 내 꿈에 뵈었으니 그 꿈 이루어 주옵소서 밤과 아침에 계시로 보여주사 항상 은혜를 주옵소서 , ( 후렴 ) 나의 놀라운 꿈 정년 나 믿기는 장차 큰 은혜 받을 표니 나의 놀라운 꿈 정녕 이루어져 주님 얼굴을 뵈오리라 .