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मैं अपने आप से कुछ भी नहीं कर सकता। केवल मेरे भीतर निवास करने वाला प्रभु ही सब कुछ कर सकता है।

  मैं अपने आप से कुछ भी नहीं कर सकता। केवल मेरे भीतर निवास करने वाला प्रभु ही सब कुछ कर सकता है।         “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता; जैसा सुनता हूँ, वैसा न्याय करता हूँ; और मेरा न्याय सच्चा है, क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, परन्तु अपने भेजनेवाले की इच्छा चाहता हूँ।” (यूहन्ना 5:30)     (1) “यीशु पर विश्वास करने के लिए गवाही” शीर्षक के अंतर्गत मैंने यूहन्ना 5:30–47 तक के पूरे भाग को केवल कोरियाई बाइबल से पढ़ा। उसके बाद भी मेरे मन में बार-बार यह इच्छा जागती रही कि मैं केवल 30वें पद पर मनन करूँ। इसलिए आज मैं पहले केवल इसी एक पद पर मनन करना चाहता हूँ। इस मनन में मैं “मेरा न्याय”, अर्थात् प्रभु के न्याय पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूँ। साथ ही, प्रकाशितवाक्य 20:11–15 में वर्णित “बड़े श्वेत सिंहासन के न्याय” पर भी विचार करते हुए उससे मिलने वाली शिक्षा ग्रहण करना चाहता हूँ।   (a) सबसे पहले, मैं यीशु के इन शब्दों पर मनन करना चाहता हूँ: “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता” [ ο ὐ δύνα μ αι ἐ γ ὼ ποιε ῖ ν ἀ π ᾽ ἐ μ αυτο ῦ ο ὐ δέν ...

담보나 보증의 함정을 경계해야 합니다.

담보나 보증의 함정을 경계해야 합니다.






우리는 담보나 보증의 함정을 경계해야 합니다.  우리는 이웃뿐만 아니라 심지어 식구들을 위해 담보하거나 그들의 빛 보증을 서는 것을 될 수 있는 데로 하지 말아야 합니다.  만일 우리가 하는 수없이 담보나 보증의 함정에 빠졌으면 우리는 노루가 사냥꾼의 손에서, 새가 그물을 치는 자의 손에서 벗어나는 것처럼 그 담보나 보증의 함정에서 빠져나와야 합니다.  우리는 우리 이웃이나 식구들에게 속히 가서 겸손한 태도로 우리가 보증 선 것을 취소시켜 달라고 부탁하여 가능한 한 거기서 빠져나오도록 해야 합니다(참고: 잠언 6:1-5, 현대인의 성경).


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