मैं अपने आप से कुछ भी नहीं कर सकता। केवल मेरे भीतर निवास करने वाला प्रभु ही सब कुछ कर सकता है। “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता; जैसा सुनता हूँ, वैसा न्याय करता हूँ; और मेरा न्याय सच्चा है, क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, परन्तु अपने भेजनेवाले की इच्छा चाहता हूँ।” (यूहन्ना 5:30) (1) “यीशु पर विश्वास करने के लिए गवाही” शीर्षक के अंतर्गत मैंने यूहन्ना 5:30–47 तक के पूरे भाग को केवल कोरियाई बाइबल से पढ़ा। उसके बाद भी मेरे मन में बार-बार यह इच्छा जागती रही कि मैं केवल 30वें पद पर मनन करूँ। इसलिए आज मैं पहले केवल इसी एक पद पर मनन करना चाहता हूँ। इस मनन में मैं “मेरा न्याय”, अर्थात् प्रभु के न्याय पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूँ। साथ ही, प्रकाशितवाक्य 20:11–15 में वर्णित “बड़े श्वेत सिंहासन के न्याय” पर भी विचार करते हुए उससे मिलने वाली शिक्षा ग्रहण करना चाहता हूँ। (a) सबसे पहले, मैं यीशु के इन शब्दों पर मनन करना चाहता हूँ: “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता” [ ο ὐ δύνα μ αι ἐ γ ὼ ποιε ῖ ν ἀ π ᾽ ἐ μ αυτο ῦ ο ὐ δέν ...
하나님은 우리의 연약함과 부족함을 잘 아시고 ... 모세가 하나님께 "주여, 나는 본래 말을 잘 못합니다. 주께서 나에게 말씀하신 이후에도 내가 그러하니 나는 말이 느리고 혀가 둔한 자입니다," "주여, 제발 다른 사람을 보내소서"하자 하나님께서는 말을 잘하는 모세의 형 아론으로 하여금 모세의 대변자가 되게 하시사 그로 하여금 모세를 대신하여 이스라엘 백성들에게 말하게 하셨습니다(출애굽기 4:10, 13-16, 현대인의 성경). 하나님은 우리의 연약함과 부족함을 잘 아시고 그 연약함과 부족함을 보완해 줄 사람을 보내주시고 우리에게 붙혀주십니다. 그 중에 제일 중요한 사람이 바로 우리의 배우자입니다.