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आइए हम एक-दूसरे से प्रेम करें। [रोमियों 13:8-10]

  आइए हम एक - दूसरे से प्रेम करें।       [ रोमियों 13:8-10]     दूसरों के साथ आपके रिश्ते कैसे हैं ? इंसानी रिश्तों पर एक सदाबहार क्लासिक किताब है जो उन लोगों के लिए उपयोगी सुझाव देती है जिन्हें लोगों से जुड़ने में मुश्किल होती है : डेल कार्नेगी की * हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपल * (How to Win Friends and Influence People) । कार्नेगी को इंसानी रिश्तों का माहिर माना जाता है। मैं आज आपके साथ इस विषय पर उनकी कुछ बातें साझा करना चाहता हूँ : (1) दूसरों में सच्ची दिलचस्पी लें ; (2) अच्छे श्रोता बनें — ऐसा आरामदायक माहौल बनाएँ जहाँ सामने वाला व्यक्ति अपने बारे में खुलकर बात कर सके ; (3) सामने वाले व्यक्ति की रुचियों के बारे में बात करें ; (4) छोटी - छोटी सुधारों के लिए भी दिल खोलकर तारीफ़ करें ; और (5) सामने वाले व्यक्ति की राय की आलोचना करने , उसे कमतर आंकने या शिकायत करने से बचें। आप क्या सोचते हैं ? ये ऐसी बातें ...

If I know that my existence is the grace of God …

 If I know that my existence is the grace of God …



If we, as Christians, understand that our existence is by the grace of God, then we should labor diligently for the Lord and His Church by the power of His grace. We should strive even more than those who do not realize this grace. If we merely say, 'It is God's grace,' with our words but do not labor with our actions, we are making that grace void (1 Cor. 15:10).

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