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मैं अपने आप से कुछ भी नहीं कर सकता। केवल मेरे भीतर निवास करने वाला प्रभु ही सब कुछ कर सकता है।

  मैं अपने आप से कुछ भी नहीं कर सकता। केवल मेरे भीतर निवास करने वाला प्रभु ही सब कुछ कर सकता है।         “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता; जैसा सुनता हूँ, वैसा न्याय करता हूँ; और मेरा न्याय सच्चा है, क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, परन्तु अपने भेजनेवाले की इच्छा चाहता हूँ।” (यूहन्ना 5:30)     (1) “यीशु पर विश्वास करने के लिए गवाही” शीर्षक के अंतर्गत मैंने यूहन्ना 5:30–47 तक के पूरे भाग को केवल कोरियाई बाइबल से पढ़ा। उसके बाद भी मेरे मन में बार-बार यह इच्छा जागती रही कि मैं केवल 30वें पद पर मनन करूँ। इसलिए आज मैं पहले केवल इसी एक पद पर मनन करना चाहता हूँ। इस मनन में मैं “मेरा न्याय”, अर्थात् प्रभु के न्याय पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूँ। साथ ही, प्रकाशितवाक्य 20:11–15 में वर्णित “बड़े श्वेत सिंहासन के न्याय” पर भी विचार करते हुए उससे मिलने वाली शिक्षा ग्रहण करना चाहता हूँ।   (a) सबसे पहले, मैं यीशु के इन शब्दों पर मनन करना चाहता हूँ: “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता” [ ο ὐ δύνα μ αι ἐ γ ὼ ποιε ῖ ν ἀ π ᾽ ἐ μ αυτο ῦ ο ὐ δέν ...

이해하기 어렵더라도 그대로 따르겠습니다.

처녀 마리아는 가브리엘 천사에게 “주의 여종이오니 말씀 대로 내게 이루어지이다”(눅1:38)하고 고백하였는데 이 고백은 “하나님의 뜻이라면, 보잘것없고 이해하기 어렵더라도 그대로 따르겠습니다”라는 깊은 신앙적 순종과 헌 신을 의미합니다.  이는 전지전능하신 하나님을 전적으로 신뢰하며, 자신의 뜻보다는 하나님의 뜻이 이루어지기를 바라는 겸손한 태도를 나타냅니다(인터넷).  우리도 마리아처럼 하나님께서 우리에게 말씀하실 때 하나님을 전적으로 신뢰하며, 우리 자신의 뜻보다 하나님의 뜻이 이루어지길 간절하 바라는 겸손한 태도로 “하나님의 뜻이라면, 보잘것없고 이해하기 어렵더라도 그대로 따르겠습니다”라는 깊은 신앙적 순종과 헌신을 할 수 있길 기원합니다.

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