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글

바울의 마지막 문안 인사 (27)

바울의 마지막 문안 인사 (27)         라오디게아 교회는 물질적으로 너무나 풍요로웠습니다 .   그들은 스스로 " 나는 부자라 부족한 것이 없다 " 고 말할 정도였습니다 .   뜨거운 온천수처럼 영적인 열정 ( 신앙의 뜨거움 ) 이 있는 것도 아니었고 , 그렇다고 차가운 냉수처럼 주변을 시원하게 해주는 선한 영향력 ( 순전함 ) 이 있는 것도 아니었습니다 .   그들은 세상과 적당히 타협하며 신앙생활을 ' 종교적 취미 ' 정도로 여 기는 안일함과 타성에 젖어 있었습니다 .   그래서 주님은 그들에게 " 차든지 뜨겁든지 하라 " 고 말씀하셨습니다 .   즉 , 주님은 온천수처럼 영적인 열정으로 사람을 살리든지 , 냉수처럼 순전함으로 사람을 시원하게 하든지 , 둘 중 하나의 확실한 영적 가치를 지녀라고 책망하신 것입니다 .   미지근한 상태는 아무짝에도 쓸모가 없기 때문입니다 .   결국 이 말씀은 " 네 신앙이 세상의 풍요에 취해 아무런 맛도 , 쓸모도 없는 미지근한 상태에 머물러 있다 " 는 것을 그들이 가장 잘 아는 ' 물 ' 의 비유로 강하게 경고하신 사랑의 책망이었습니다 .

केवल मुझे भेजने वाले प्रभु के जीवंत और जीवनदायी वचनों को ईमानदारी से पहुँचाने वाले भण्डारी की आज्ञाकारिता

  केवल मुझे भेजने वाले प्रभु के जीवंत और जीवनदायी वचनों को ईमानदारी से पहुँचाने वाले भण्डारी की आज्ञाकारिता         “ जो ऊपर से आता है , वह सबके ऊपर है ; जो पृथ्वी से है , वह पृथ्वी का है और पृथ्वी की बातें कहता है। जो स्वर्ग से आता है , वह सबके ऊपर है। उसने जो देखा और सुना है , उसी की गवाही देता है , परन्तु कोई उसकी गवाही ग्रहण नहीं करता। जिसने उसकी गवाही ग्रहण की है , उसने इस बात पर अपनी मुहर लगा दी है कि परमेश्वर सच्चा है। क्योंकि जिसे परमेश्वर ने भेजा है , वह परमेश्वर के वचन बोलता है ; क्योंकि परमेश्वर आत्मा को बिना नाप - तौल के देता है। पिता पुत्र से प्रेम करता है और उसने सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया है। जो पुत्र पर विश्वास करता है , अनन्त जीवन उसका है ; परन्तु जो पुत्र की आज्ञा नहीं मानता , वह जीवन को नहीं देखेगा , बल्कि परमेश्वर का क्रोध उस पर बना रहता है। ” ( यूहन्ना 3:31–36)     (1) पहला ...