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“मेरे साथ जो हुआ है, उसने असल में…” (फिलिप्पियों 1:12)

  “ मेरे साथ जो हुआ है , उसने असल में …”       “ भाइयों और बहनों , मैं चाहता हूँ कि आप जानें कि मेरे साथ जो हुआ है , उसने असल में सुसमाचार को आगे बढ़ाने में मदद की है ” ( फिलिप्पियों 1:12) ।     मैं अपनी मौजूदा स्थिति को कैसे देखता हूँ ? क्या यह सच में वैसी स्थिति है जैसी मैं चाहता था या जिसकी मुझे उम्मीद थी ? ज़्यादातर संभावना यही है कि अभी मैं जिन हालात का सामना कर रहा हूँ , वे न तो मेरी चाहत के मुताबिक हैं और न ही मैंने उनके बारे में ऐसा सोचा था। इसलिए , मैं अपनी स्थिति से खुश नहीं हूँ और इसकी वजह से परेशान हूँ। यह सब बहुत दुखद और तकलीफदेह है। मुझे निराशा महसूस हो रही है ; पता नहीं कब तक मुझे ऐसी मुश्किल और दर्दनाक हालत में रहना पड़ेगा। मैं जितना ज़्यादा अपने हालात के बारे में सोचता हूँ , उतना ही निराश — और यहाँ तक कि हताश — होता जाता हूँ। मुझे कोई उम्मीद नज़र नहीं आती। मैं क्या करूँ ?  ...

我们绝不可错失神所赐予我们的时光……

们绝不可失神所予我光……

 

 

周日上午,我探望了住进疗养院的挚爱大伯。我看他戴着氧气沉睡着。看着他那艰难的呼吸,我把手放在他的心口,向父神上了告。

 

韩语礼束后不久,我看了家庭群聊的信息。得知他的家人——子女和孙辈——正伏在他耳,向挚爱的父和祖父诉说最后的告。我看到了一条来自小叔的信息,他目前在埃及做宣士;他KakaoTalk转达他的临别赠言——“谢谢您,我爱您”。他正埃及赶,打算明天探望位姐夫(或妹夫)……但我担心,到那大伯是否健在。多年前,小叔在印度服事,曾赶回希望能因癌症病危的三伯最后一面,果三伯在他赶路途中就去世了;最,他只能加葬后便返回了印度……我担心重演……

 

我不禁想起《32话语:生有,死有。“哭有,笑有;哀,跳舞有”(第4)。“,恨有……”(第8)。

 

我深思着神所定的刻。我们并有机挚爱的父母表意,也时间恕或恕……我们绝不可失神所予我光……


[2015817]


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