“ मेरे साथ जो हुआ है , उसने असल में …” “ भाइयों और बहनों , मैं चाहता हूँ कि आप जानें कि मेरे साथ जो हुआ है , उसने असल में सुसमाचार को आगे बढ़ाने में मदद की है ” ( फिलिप्पियों 1:12) । मैं अपनी मौजूदा स्थिति को कैसे देखता हूँ ? क्या यह सच में वैसी स्थिति है जैसी मैं चाहता था या जिसकी मुझे उम्मीद थी ? ज़्यादातर संभावना यही है कि अभी मैं जिन हालात का सामना कर रहा हूँ , वे न तो मेरी चाहत के मुताबिक हैं और न ही मैंने उनके बारे में ऐसा सोचा था। इसलिए , मैं अपनी स्थिति से खुश नहीं हूँ और इसकी वजह से परेशान हूँ। यह सब बहुत दुखद और तकलीफदेह है। मुझे निराशा महसूस हो रही है ; पता नहीं कब तक मुझे ऐसी मुश्किल और दर्दनाक हालत में रहना पड़ेगा। मैं जितना ज़्यादा अपने हालात के बारे में सोचता हूँ , उतना ही निराश — और यहाँ तक कि हताश — होता जाता हूँ। मुझे कोई उम्मीद नज़र नहीं आती। मैं क्या करूँ ? ...
السيدة تشوي بون - نام بعد القداس المشترك في أحد الفصح، وبينما كنا نتبادل التحيات والمصافحة، اقتربتُ من السيدة تشوي بون - نام — التي كانت قد تجاوزت الثمانين من عمرها — لأحيّيها . نظرت إليّ وقالت بابتسامة مشرقة : " أتساءل متى سيدعوني الرب للعودة إلى الديار؟ " لا أزال أتذكر تلك اللحظة بوضوح تام؛ فقد كانت قد فقدت زوجها منذ زمن بعيد، كما توفي اثنان من أبنائها الستة . ثم، وقبل فترة وجيزة، عثرت على الابن الذي كانت تعيش معه جثة هامدة باردة عندما حاولت إيقاظه في الصباح؛ وهي مأساة تركتها تصرخ وتنتحب من شدة الحزن . وبعد مراسم جنازة ذلك الابن، قالت لي : " أشعر بالاستياء تجاه الله ". لا يمكنني حتى أن أتخيل حال قلب أم اضطرت لدفن ثلاثة من أبنائها الستة ... ومع ذلك، فإن تذكر ابتسامة السيدة تشوي وهي تعبّر عن توقها إلى السماء بعد قداس الفصح ذاك يملأني بالفرح . 1 أبريل 2013 في ذكرى الراحلة السيدة ...